लखनऊ: समाजवादी पार्टी के संरक्षक दिवंगत मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव का पार्थिव शरीर अपने अंतिम सफर पर निकल चुका है। लखनऊ स्थित उनके आवास से शव यात्रा भैंसा कुंड (बैकुंठ धाम) के लिए रवाना हो गई है। इस दौरान हजारों की संख्या में समर्थकों और परिजनों की आंखें नम दिखीं।

अंतिम यात्रा में उमड़ा दिग्गजों का जमावड़ा

प्रतीक यादव की अंतिम यात्रा की गाड़ी में शिवपाल यादव के बेटे आदित्य यादव और अपर्णा यादव के भाई अमन विष्ट पार्थिव शरीर के साथ नजर आए। वहीं, बैकुंठ धाम पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और वीआईपी नेताओं का पहुंचना जारी है।

  • अखिलेश यादव के बेटे अर्जुन यादव भैंसा कुंड पहुंच चुके हैं।
  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे नीरज सिंह भी शोक व्यक्त करने बैकुंठ धाम पहुंचे हैं।
  • सपा नेता शिवपाल यादव और अखिलेश यादव के भी जल्द ही वहां पहुंचने की संभावना है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट: सामने आई मौत की असली वजह

प्रतीक यादव के निधन के बाद आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने उनकी मृत्यु के कारणों को स्पष्ट कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार:

  1. फेफड़ों में खून के थक्के: प्रतीक के फेफड़ों में खून के थक्के (Blood Clots) जम गए थे।
  2. ऑर्गन फेलियर: इन थक्कों की वजह से उनके दिल और फेफड़ों ने काम करना बंद कर दिया, जो अंततः मृत्यु का कारण बना।
  3. सैंपल सुरक्षित: डॉक्टरों ने थक्कों के सैंपल को आगे की विस्तृत जांच के लिए सुरक्षित रख लिया है।

लंबे समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे प्रतीक

उनका इलाज करने वाले डॉक्टरों के मुताबिक, प्रतीक यादव पिछले 5-6 वर्षों से हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) के मरीज थे। हाल के दिनों में उनकी स्थिति काफी गंभीर हो गई थी:

  • उन्हें ‘डीप वेन थ्रोम्बोसिस’ (DVT) और पल्मोनरी एम्बोलिज्म की शिकायत थी।
  • करीब 3 हफ्ते पहले ही उनमें पल्मोनरी एम्बोलिज्म डायग्नोज हुआ था।
  • निधन से ठीक पहले उन्हें अचानक सांस लेने में भारी दिक्कत और बेचैनी महसूस होने लगी थी।

‘प्रतीक यादव अमर रहे’ के नारों से गूंजा लखनऊ

जैसे ही प्रतीक यादव का पार्थिव शरीर आवास से बाहर निकला, वहां मौजूद भीड़ भावुक हो गई। समर्थकों ने ‘प्रतीक यादव अमर रहे’ के नारे लगाए। भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने यातायात और सुरक्षा के विशेष प्रबंध किए हैं।

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