देश में सोने के आभूषण के खिलाफ मिलने वाले गोल्ड लोन का बाजार दो साल में दोगुना बढ़ गया है और यह अब लगभग ₹15.6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। यह खुलासा क्रिफ हाई मार्क की नवीनतम रिपोर्ट में किया गया है, जिसमें नवंबर 2025 तक के आंकड़ों का विश्लेषण शामिल है।

रिपोर्ट के अनुसार, सोने की बढ़ती कीमतों और मजबूत (कोलैटरल) वैल्यू के कारण बैंकों और एनबीएफसी (गैर‑बैंकिंग वित्तीय कंपनियों) ने इस लोन सेगमेंट में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। नवंबर 2025 तक गोल्ड लोन में 42% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि पिछले वर्ष भी 39% की बढ़ोतरी थी।

साल 2023 में ₹7.9 लाख करोड़ रहा कुल गोल्ड लोन पोर्टफोलियो अब दो साल में बढ़कर ₹15.6 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। वहीं कुल खुदरा कर्ज के भीतर गोल्ड लोन की हिस्सेदारी भी बढ़कर 9.7% हो गई है, जो एक साल पहले 8.1% थी।

बता दें, इस तेजी के पीछे मुख्य कारण सोने के दामों में लगातार वृद्धि और इसके सुरक्षित गिरवी होने की धारणा की वजह से बैंकों का भरोसा है। सोने की ऊंची कीमतों ने कर्जदारों की पात्रता बढ़ाई है, जिससे अधिक राशि तक लोन मिल रहा है।

वहीं, मार्केट शेयर की बात करें तो, सरकारी स्वामित्व वाले बैंकों का गोल्ड लोन में दबदबा बना हुआ है और उनकी हिस्सेदारी लगभग 60% के आसपास है, जबकि गोल्ड लोन पर फोकस्ड एनबीएफसी का हिस्सा करीब 8.1% है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कुल गोल्ड लोन में 56% से अधिक लोन पुरुष उधारकर्ताओं ने लिया है, जबकि महिला उधारकर्ता समय पर लोन चुकाने के मामले में पुरुषों से बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। इसके अलावा, जिन कर्ज की राशि ₹2.5 लाख से अधिक है, वे अब कुल पोर्टफोलियो का लगभग आधा हिस्सा बन चुके हैं।

कुल मिलाकर, गोल्ड लोन अब सिर्फ इमर्जेंसी फंड के लिए नहीं बल्कि एक मुख्यधारा का क्रेडिट विकल्प बन चुका है, जिससे ऋण बाजार में इसका हिस्सा लगातार बढ़ रहा है।

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