INS Khanderi to become more lethal: Indigenous AIP system to be installed by December 2026, making it difficult for the enemy to track. भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में भारतीय नौसेना एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। नौसेना की पनडुब्बी INS खांदेरी में दिसंबर 2026 तक स्वदेशी Air-Independent Propulsion (AIP) सिस्टम लगाया जाएगा। इस अत्याधुनिक तकनीक के लगने के बाद पनडुब्बी की ताकत और गुप्त तरीके से ऑपरेशन करने की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।

रक्षा सूत्रों के मुताबिक यह AIP तकनीक Defence Research and Development Organisation (DRDO) द्वारा विकसित की गई है। इसके जरूरी परीक्षण पूरे हो चुके हैं और अगले तीन से चार महीनों में इसका एनर्जी मॉड्यूल मुंबई स्थित Mazagon Dock Shipbuilders Limited को सौंप दिया जाएगा।

जब INS खांदेरी रिफिट के लिए डॉक में जाएगी, तब इस मॉड्यूल को पनडुब्बी के अंदर स्थापित किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार समुद्री परीक्षण जुलाई-अगस्त 2027 में शुरू हो सकते हैं, जबकि पूरी रिफिट प्रक्रिया 2028 की शुरुआत तक पूरी होने की संभावना है।

क्या है AIP तकनीक

Air-Independent Propulsion (AIP) एक ऐसी आधुनिक तकनीक है, जिसकी मदद से डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां लंबे समय तक बिना सतह पर आए समुद्र के अंदर रह सकती हैं। सामान्य तौर पर पारंपरिक पनडुब्बियों को बैटरी चार्ज करने के लिए समय-समय पर सतह पर आना पड़ता है, जिससे दुश्मन के रडार से पकड़े जाने का खतरा बढ़ जाता है।

लेकिन AIP सिस्टम लगने के बाद पनडुब्बी कई हफ्तों तक पानी के अंदर रहकर मिशन पूरा कर सकती है, जिससे उसकी स्टील्थ क्षमता काफी बढ़ जाती है।

क्यों अहम है यह तकनीक

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक AIP सिस्टम लगने के बाद पनडुब्बी को दुश्मन के लिए ट्रैक करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। इससे भारतीय नौसेना की रणनीतिक ताकत और ऑपरेशनल क्षमता दोनों में बड़ा इजाफा होगा। इस तकनीक का एक और फायदा यह है कि यह पर्यावरण के लिहाज से भी सुरक्षित मानी जाती है, क्योंकि इसके संचालन के दौरान उप-उत्पाद के रूप में केवल साफ पानी निकलता है।

कालवरी क्लास की पनडुब्बियां

INS खांदेरी कालवरी क्लास (Kalvari-class) पनडुब्बियों का हिस्सा है। इन पनडुब्बियों का निर्माण मुंबई में फ्रांस की कंपनी Naval Group के सहयोग से किया गया है। इस प्रोजेक्ट के तहत कुल 6 आधुनिक पनडुब्बियां भारतीय नौसेना में शामिल की जा चुकी हैं। वर्तमान में भारतीय नौसेना के पास करीब 16 पारंपरिक पनडुब्बियां हैं, जिनमें से कई 30 साल से अधिक पुरानी हो चुकी हैं। ऐसे में नई तकनीक और आधुनिक अपग्रेड के जरिए नौसेना की क्षमता को मजबूत करना बेहद जरूरी माना जा रहा है।

INS खांदेरी में AIP सिस्टम लगने के बाद भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी रणनीतिक मौजूदगी और समुद्री सुरक्षा को और मजबूत कर सकेगी।

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