दिल्ली-एनसीआर में ऐप आधारित और लोकल टैक्सी सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ ही यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं भी गहराती जा रही हैं। हाल के वर्षों में कैब चालकों से जुड़े कई आपराधिक मामलों ने खासकर महिलाओं, देर रात यात्रा करने वाले यात्रियों और आम लोगों के बीच असुरक्षा की भावना पैदा की है।
हालिया घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
कैब कंपनियों और पुलिस की ओर से सुरक्षा के दावे किए जाते हैं, लेकिन कई मामलों में चालक ही अपराध में शामिल पाए गए हैं। हाल के कुछ मामलों ने एक बार फिर कैब सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चलती कैब में अश्लील हरकत का मामला
मार्च में गुरुग्राम से दिल्ली जा रही एक महिला सॉफ्टवेयर इंजीनियर के साथ कैब में शर्मनाक घटना सामने आई। महिला ने ऑफिस जाने के लिए कैब बुक की थी। यात्रा के दौरान चालक ने कथित तौर पर अश्लील हरकत शुरू कर दी। महिला ने सूझबूझ दिखाते हुए पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड किया और पुलिस को सूचना दी। शिकायत के बाद आरोपी चालक को गिरफ्तार कर लिया गया।
एक्सप्रेसवे पर लूटपाट करने वाला गिरोह पकड़ा गया
दिसंबर 2025 में दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे और रिंग रोड पर यात्रियों से लूटपाट करने वाले गिरोह का खुलासा हुआ था। जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य पंजीकृत कैब चालक थे। आरोप था कि वे यात्रियों को सुनसान स्थानों पर ले जाकर नकदी, मोबाइल और अन्य सामान लूट लेते थे।
पहले भी सामने आ चुके हैं चर्चित मामले
कैब सेवाओं से जुड़े अपराधों में 2014 का चर्चित उबर दुष्कर्म मामला और 2017 में एक डॉक्टर के अपहरण का मामला भी शामिल है। इन घटनाओं में चालकों के सत्यापन और पहचान प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।
क्यों बढ़ रही है सुरक्षा की चुनौती?
यात्रियों के भरोसे का दुरुपयोग
यात्री आमतौर पर पंजीकृत कैब सेवाओं को सुरक्षित मानकर यात्रा करते हैं। ऐसे में यदि चालक ही अपराध में शामिल हो जाए तो यात्रियों के लिए स्थिति और अधिक जोखिमपूर्ण हो जाती है।
फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल
जांच में कई बार सामने आया है कि कुछ चालक पुलिस सत्यापन और लाइसेंस प्रक्रिया के दौरान गलत या फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करते हैं। ऐसे मामलों में वास्तविक पहचान का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
एक अकाउंट, कई चालक
दिल्ली-एनसीआर में कई बार ऐसा भी देखा गया है कि ऐप पर पंजीकृत चालक के बजाय कोई अन्य व्यक्ति वाहन चला रहा होता है। इससे किसी घटना के बाद वास्तविक आरोपी तक पहुंचना कठिन हो सकता है।
कैब चालकों के लिए क्या हैं नियम?
पुलिस सत्यापन और बैज जरूरी
दिल्ली में व्यावसायिक टैक्सी या कैब चलाने के लिए पब्लिक सर्विस व्हीकल बैज अनिवार्य है। यह बैज पुलिस सत्यापन और चरित्र जांच के बाद जारी किया जाता है।
एग्रीगेटर कंपनियों की जिम्मेदारी
नियमों के अनुसार ओला, उबर जैसी कंपनियों के लिए किसी भी चालक को प्लेटफॉर्म से जोड़ने से पहले उसका पुलिस सत्यापन सुनिश्चित करना आवश्यक है। नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई का भी प्रावधान है।
जीपीएस और पैनिक बटन अनिवार्य
व्यावसायिक कैब में जीपीएस और पैनिक बटन की सुविधा अनिवार्य है, ताकि आपात स्थिति में तुरंत मदद मिल सके।
यात्रियों के लिए क्या है सलाह?
सुरक्षा विशेषज्ञों और पुलिस का कहना है कि कैब में बैठने से पहले ऐप में दिख रहे वाहन नंबर और चालक की पहचान का मिलान अवश्य करना चाहिए। यदि किसी प्रकार की असंगति दिखाई दे तो यात्रा रद्द कर तुरंत संबंधित एजेंसी या पुलिस को सूचना देनी चाहिए।














