Delhi: हाई कोर्ट ने बुधवार को ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (AIBE) में नेगेटिव मार्किंग लागू करने की मांग वाली एक पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) को खारिज कर दिया हैं। कोर्ट ने इसे बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के पॉलिसी डोमेन का मामला बताते हुए कहा कि अदालत इस तरह के मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती।
बता दें, चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, “यह एक पॉलिसी निर्णय है, जिसे संबंधित अथॉरिटी द्वारा लिया जाना चाहिए। BCI ने पहले ही नेगेटिव मार्किंग न करने का फैसला किया है। हम इस पर निर्देश कैसे दे सकते हैं?”
वहीं, वकील शन्नू बघेल द्वारा दायर की गई यह PIL, AIBE में नेगेटिव मार्किंग लागू करने की मांग कर रही थी। पिटीशनर ने दलील दी कि यह कदम लीगल प्रोफेशन की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आवश्यक है। उन्होंने संविधान के आर्टिकल 226 के तहत यह पिटीशन दायर की थी, जिसमें लीगल प्रोफेशन के स्टैंडर्ड और समाज पर इसके प्रभाव को लेकर चिंता जताई गई थी।
बता दें, पिटीशन में यह भी कहा गया कि AIBE, जिसे BCI सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में प्रैक्टिस करने के लिए वकीलों को परमानेंट एनरोलमेंट देने के लिए आयोजित करता है, प्रोफेशनल स्टैंडर्ड बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। पिटीशनर ने यह भी तर्क दिया कि गैर-कानूनी तरीकों से डिग्री मिलने और नकली डिग्रियों के मामलों के कारण लीगल सर्विस की गुणवत्ता में गिरावट आ रही है।
इस संदर्भ में, पिटीशन में सुझाव दिया गया था कि AIBE में नेगेटिव मार्किंग लागू करने से कैंडिडेट्स में गंभीरता बढ़ेगी और प्रोफेशन की ईमानदारी सुनिश्चित होगी, खासकर आगामी अप्रैल 2026 की परीक्षा से।
हालांकि, अदालत ने यह स्पष्ट किया कि परीक्षा के पैटर्न और मूल्यांकन के तरीकों से जुड़े फैसले BCI के पॉलिसी निर्णय हैं और जब संबंधित अथॉरिटी ने पहले ही नेगेटिव मार्किंग न करने का निर्णय लिया है, तो अदालत इस मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकती। इसके बाद, कोर्ट ने PIL को खारिज कर दिया।



