उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनकर लोग इसे किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं। डॉक्टरों द्वारा ‘ब्रेन डेड’ घोषित की गई एक महिला अचानक दोबारा सांस लेने लगी। हैरानी की बात यह है कि यह बदलाव एंबुलेंस को रास्ते में लगे एक गड्ढे से जोरदार झटका लगने के बाद हुआ। अब यह घटना इलाके में चर्चा का विषय बन गई है।

जानकारी के अनुसार पीलीभीत जिले की रहने वाली 50 वर्षीय विनीता शुक्ला अचानक बेहोश हो गई थीं। परिजन उन्हें इलाज के लिए पहले पीलीभीत के ऑटोनॉमस स्टेट मेडिकल कॉलेज ले गए। वहां उनकी हालत गंभीर देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए बरेली के एक बड़े अस्पताल में रेफर कर दिया।

बरेली के अस्पताल में इलाज के दौरान डॉक्टरों ने विनीता शुक्ला की हालत बेहद गंभीर बताई। मेडिकल जांच में उनके ब्रेनस्टेम रिफ्लेक्सेस काम नहीं कर रहे थे और ग्लासगो कोमा स्केल भी सामान्य स्तर से काफी नीचे पहुंच गया था। डॉक्टरों ने परिवार को बताया कि मरीज के बचने की संभावना बहुत कम है। बाद में उन्हें ‘ब्रेन डेड’ घोषित कर दिया गया और अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

24 फरवरी को विनीता शुक्ला के पति कुलदीप कुमार शुक्ला उन्हें एंबुलेंस से लेकर घर के लिए निकल पड़े। परिवार इस दुखद स्थिति के लिए मानसिक रूप से तैयार हो चुका था। यहां तक कि उन्होंने घर पर अंतिम संस्कार की तैयारी करने के लिए भी कह दिया था।

रास्ते में बरेली-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग-74 पर एंबुलेंस एक बड़े गड्ढे में जा गिरी। इस दौरान एंबुलेंस को जोरदार झटका लगा। इसी झटके के बाद अचानक ऐसा हुआ जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। विनीता शुक्ला ने दोबारा सामान्य तरीके से सांस लेना शुरू कर दिया।

विनीता के पति कुलदीप कुमार शुक्ला ने बताया कि उस समय उनकी पत्नी की सांस लगभग बंद हो चुकी थी और दिल की धड़कन भी बहुत धीमी थी। जैसे ही एंबुलेंस हाफिजगंज क्षेत्र के पास एक गड्ढे में फंसी और उसे निकालने के लिए वाहन को झटका लगा, उसी के बाद उनकी पत्नी की सांस सामान्य होने लगी। यह देखकर वे हैरान रह गए। उन्होंने तुरंत अपने परिवार को फोन करके अंतिम संस्कार की तैयारियां रोकने के लिए कहा।

इसके बाद कुलदीप कुमार शुक्ला अपनी पत्नी को लेकर तुरंत पीलीभीत के न्यूरोसिटी हॉस्पिटल पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने उनका इलाज शुरू किया। अस्पताल के न्यूरोसर्जन डॉ. राकेश सिंह ने बताया कि इलाज शुरू करने से पहले उन्होंने बरेली के अस्पताल से मरीज की पूरी मेडिकल जानकारी और रिपोर्ट मंगवाई।

डॉ. राकेश सिंह के अनुसार विनीता शुक्ला के ब्रेनस्टेम रिफ्लेक्सेस काम नहीं कर रहे थे और उनकी आंखों की जांच में पुतलियों का फैलाव भी देखा गया था, जो गंभीर न्यूरोलॉजिकल स्थिति की ओर संकेत करता है। मेडिकल परीक्षणों में उनके शरीर में भारी मात्रा में न्यूरोटॉक्सिन भी पाए गए थे।

हालांकि बाद में दी गई चिकित्सकीय देखभाल और उपचार के बाद उनकी स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ। अब विनीता शुक्ला पूरी तरह होश में हैं और अपने परिवार से बातचीत भी कर रही हैं। सोमवार को उन्हें अस्पताल से छुट्टी देकर घर भेज दिया गया। परिवार के अनुसार विनीता शुक्ला पीलीभीत की न्यायिक अदालत में कॉपी सेक्शन में सीनियर असिस्टेंट के पद पर कार्यरत हैं। इस घटना के बाद उनका परिवार इसे किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहा है।

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