भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी के बीच, यूरोपीय यूनियन की विदेश मामलों और सुरक्षा नीति की हाई रिप्रेजेंटेटिव काजा कल्लास ने दोनों देशों के रिश्तों में महत्वपूर्ण बदलाव की संभावना जताई है। कल्लास ने बुधवार, 21 जनवरी को कहा कि इस बढ़ती खतरनाक दुनिया में दोनों देशों का एक साथ मिलकर काम करना बेहद जरूरी है। उन्होंने आगे कहा कि, “भारत और यूरोप का सहयोग दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगा।”
बता दें, गणतंत्र दिवस 2026 के समारोह में इस बार यूरोपीय संघ की प्रमुख नेता काजा कल्लास सहित EU टॉप लीडरशिप के मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होने की संभावना है। इसके बाद 16वीं EU-भारत समिट का आयोजन किया जाएगा, जिसमें महत्वपूर्ण व्यापार और सुरक्षा समझौतों की संभावना जताई जा रही है।
बता दें, काजा कल्लास ने यूरोपीय संसद को संबोधित करते हुए कहा कि भारत यूरोप के लिए बेहद जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा, “हम भारत के साथ नए एजेंडे पर काम करने के लिए तैयार हैं, जिसमें व्यापार, सुरक्षा, टेक्नोलॉजी और लोग-to-लोग संबंधों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।” साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस साझेदारी से दोनों देशों को भारी लाभ होगा, खासकर उस समय में जब अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था युद्धों और दबावों के चलते कठिन दौर से गुजर रही है।
वहीं, काजा कल्लास ने कहा कि EU और भारत के बीच तीन प्रमुख डील हो सकती हैं, जिनमें व्यापार समझौते से लेकर रक्षा मामलों तक कई क्षेत्रों में समझौतों की संभावना जताई जा रही है।
27 जनवरी तक यूरोपीय संघ और भारत के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत पूरी हो सकती है। इस डील से व्यापारिक मार्गों में सुधार, रुकावटें हटाने और प्रमुख क्षेत्रों जैसे क्लीन टेक्नोलॉजी, फार्मास्यूटिकल्स और सेमीकंडक्टर में सप्लाई चेन को मजबूत करने की उम्मीद जताई जा रही है।
बता दें, काजा कल्लास ने यह भी कहा कि वे अगले हफ्ते नई दिल्ली में EU-भारत सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार हैं। यह समझौता समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी और साइबर सुरक्षा क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देगा।
वहीं, इसके साथ ही दोनों देशों के बीच सूचना सुरक्षा समझौते पर बातचीत शुरू की जाएगी। इसके अलावा, दोनों पक्षों ने श्रमिकों, छात्रों, शोधकर्ताओं और उच्च कुशल पेशेवरों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए एक व्यापक ढांचे पर एक समझौता ज्ञापन (MOU) को अंतिम रूप देने की योजना बनाई है।
हालांकि, भारत और यूरोपीय संघ की इस बढ़ती साझेदारी से दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, और लोगों के बीच संबंधों को नई दिशा मिलेगी, जो वैश्विक परिस्थितियों में दोनों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है।













