इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा, जो कि महाभियोग प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं, जिस पर आखिरकार संसदीय जांच समिति के सामने अपनी सफाई पेश की। सुप्रीम कोर्ट से झटका मिलने के बाद जस्टिस वर्मा ने अपने खिलाफ लगे आरोपों का जोरदार खंडन किया। उन्होंने कहा कि जब दिल्ली स्थित उनके सरकारी आवास पर आग लगी थी, तब वह वहां मौजूद नहीं थे और ना ही उस समय मौके पर कैश बरामदगी की कोई जानकारी थी।

बता दें, लोकसभा स्पीकर द्वारा गठित जांच समिति के सामने जस्टिस वर्मा ने अपना बचाव करते हुए कहा, “अगर पुलिस और फायर डिपार्टमेंट के अधिकारी मेरे आवास को सुरक्षित नहीं रख पाए, तो इसके लिए मुझे जिम्मेदार क्यों ठहराया जाए?” उन्होंने यह भी कहा कि अगर वे पहले व्यक्ति नहीं थे जो घटना स्थल पर पहुंचे, तो इस मामले में उनकी जिम्मेदारी नहीं बनती।

सूत्रों के अनुसार, जस्टिस वर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि घटना के समय कोई कैश बरामद नहीं हुआ था और बाद में इस मामले में कैश मिलने के दावे सामने आए। उन्होंने यह सवाल उठाया कि अगर वह घटना स्थल पर नहीं थे और पहले रिस्पॉन्डर भी नहीं थे, तो उन्हें इसके लिए जिम्मेदार क्यों ठहराया जा रहा है?

वहीं, जस्टिस वर्मा ने आगे यह भी कहा कि, “उस जगह पर मौजूद पुलिस और फायर डिपार्टमेंट के अधिकारी पूरी तरह से नियंत्रण में थे, और उन्हें अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए थी।”

पिछले साल मार्च में दिल्ली में जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास में आग लग गई थी, और जब अग्निशमन विभाग ने आग बुझाई, तो वहां अधजले हुए कैश के ढेर मिले थे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया था।

बता दें, आग के इस हादसे के बाद, लोकसभा स्पीकर ने महाभियोग प्रस्ताव पर आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय पैनल का गठन किया। जस्टिस वर्मा ने इस पैनल के गठन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली और उन्हें जांच समिति के सामने पेश होना पड़ा।

अब देखना यह है कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाती है और जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रक्रिया के क्या परिणाम निकलते हैं।

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