वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती धाक और मजबूत होती आर्थिक स्थिति को लेकर अमेरिका से एक बेहद बड़ा और सकारात्मक बयान सामने आया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पूर्व डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी सलाहकार विक्टोरिया कोट्स ने साफ शब्दों में कहा है कि यूनाइटेड स्टेट्स के लिए चीन के मुकाबले भारत एक कहीं बेहतर, मजबूत और भरोसेमंद पार्टनर है। कोट्स ने भारत की तारीफ करते हुए कहा कि भारत अब महज एक विकासशील देश नहीं रह गया है, बल्कि तेजी से आगे बढ़ते हुए एक ‘ग्लोबल सुपरपावर’ बनने की राह पर है।
यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब हाल ही में 26 मई को भारत और अमेरिका ने एक द्विपक्षीय ‘क्रिटिकल मिनरल्स फ्रेमवर्क’ पर हस्ताक्षर किए हैं, जो दोनों देशों के बीच उन्नत प्रौद्योगिकी और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। विक्टोरिया कोट्स ने मीडिया से बातचीत में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच के व्यक्तिगत रिश्ते बेहद सच्चे और मजबूत हैं, जो जनवरी 2025 में हुई उनकी मुलाकात के बाद दोनों देशों के आगामी रिश्तों के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार कर चुके हैं।
AI वॉर गेम ‘ऑपरेशन टाइडल वेव’ और वैश्विक मंदी का खतरा
कोट्स ने अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनाव और हाल ही में राष्ट्रपति ट्रंप की बीजिंग यात्रा का जिक्र करते हुए एक चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि अमेरिका ने हाल ही में चीन के साथ संभावित युद्ध को लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जनित एक बड़ा वॉर गेम (सिमुलेशन) किया था, जिसे ‘ऑपरेशन टाइडल वेव’ नाम दिया गया है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “इस वॉर गेम के दौरान एआई की मदद से हजारों संभावित परिदृश्यों को परखा गया। उन सभी में एक बात बिल्कुल साफ और समान निकलकर सामने आई कि यदि अमेरिका और चीन के बीच सीधी लड़ाई शुरू होती है, तो उसका नतीजा चाहे जो भी हो, लेकिन वैश्विक जीडीपी को तुरंत 10% का भारी झटका लगेगा।” कोट्स के मुताबिक, इस 10% की गिरावट का सीधा मतलब होगा पूरी दुनिया में भयानक आर्थिक मंदी और महामंदी। उन्होंने कहा कि अमेरिका हर कीमत पर चीन के साथ इस सीधे युद्ध से बचना चाहता है और यही वजह है कि वाशिंगटन चीन के साथ अपने रिश्तों को बेहद सावधानी से मैनेज कर रहा है।
रूस-भारत संबंधों पर बेबाक राय
अमेरिकी एक्सपर्ट ने स्वीकार किया कि रूस के साथ भारत के पुराने और घनिष्ठ संबंधों, विशेषकर यूक्रेन विवाद को लेकर अमेरिका और भारत के बीच थोड़े मतभेद जरूर हैं। लेकिन उन्होंने भरोसा जताया कि अमेरिका अपनी बढ़ती नेचुरल गैस की क्षमता के जरिए भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर सकता है, जिससे रूसी गैस और तेल पर भारत की निर्भरता को कम किया जा सके। कोट्स ने जोर देकर कहा कि भारत-अमेरिका की यह जुगलबंदी सिर्फ एक व्यापारिक साझेदारी नहीं रहने वाली है, बल्कि यह सुरक्षा, तकनीक, वर्कफोर्स और क्रिटिकल सेक्टर्स में असीमित संभावनाओं का एक नया दौर शुरू करेगी जो दोनों देशों के सर्वोत्तम हित में है।



