डेस्क : US सुप्रीम कोर्ट के द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के IEEPA (International Emergency Economic Powers Act) के तहत देशों पर लगाए गए आपसी टैरिफ को रद्द करने के बाद, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने भारत सरकार से यह सवाल पूछा है कि इस फैसले का भारत और US के बीच हाल ही में घोषित ट्रेड डील पर क्या असर होगा।

चिदंबरम ने एक कॉलम में कहा कि यदि सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ लगाने के फैसले को रद्द कर दिया, तो भारत और US 2 अप्रैल, 2025 से पहले वाली स्थिति में वापस लौट जाएंगे। उन्होंने हाल में हुए ट्रेड डील फ्रेमवर्क का उल्लेख किया, जिसमें US ने भारत को बिना किसी शर्त के कई रियायतें देने की घोषणा की थी। चिदंबरम ने X (पूर्व में Twitter) पर लिखा, “उन रियायतों का क्या होगा?”

भारत-US के जॉइंट स्टेटमेंट में यह घोषणा की गई थी कि US भारत को कई सामानों पर ज़ीरो टैरिफ देगा। इसके अलावा, भारत का इरादा US से 500 बिलियन डॉलर का सामान इंपोर्ट करने का था, जिसमें ऊर्जा और अन्य वस्तुएं शामिल थीं। भारत ने US के कुछ सामानों के लिए नॉन-टैरिफ रुकावटों को हटाने पर भी सहमति जताई थी। चिदंबरम ने सवाल किया, “उन वादों का क्या होगा?”

चिदंबरम ने US में भारतीय ट्रेड डेलीगेशन पर भी सवाल उठाया
चिदंबरम ने अगले हफ़्ते US में भारतीय ट्रेड डेलीगेशन के दौरे का उल्लेख किया, जिसमें संभवत: फ्रेमवर्क एग्रीमेंट के टेक्स्ट को फाइनल किया जाएगा। उन्होंने पूछा कि अब US सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह टीम क्या करेगी। चिदंबरम ने X पर लिखा, “एक भारतीय टीम अब फ्रेमवर्क एग्रीमेंट के टेक्स्ट को फाइनल करने के लिए US में है। अब टीम क्या करेगी? सरकार को यह बताना होगा कि 6 फरवरी को US और भारत के बीच हुई ‘डील’ पर फैसले का क्या असर होगा।”

US सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई के बाद, राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया कि वह 1974 के ट्रेड एक्ट के सेक्शन 122 को लागू करेंगे। यह एक ऐसा प्रावधान है जिसके बारे में बहुत कम चर्चा की जाती है, और यह बैलेंस-ऑफ-पेमेंट्स की समस्याओं के जवाब में टेम्पररी टैरिफ लगाने की अनुमति देता है।

सेक्शन 122 के तहत, US राष्ट्रपति को बैलेंस-ऑफ-पेमेंट्स के “बड़े और गंभीर” घाटे को ठीक करने के लिए 15% तक के टेम्पररी टैरिफ लगाने का अधिकार है, और यह टैरिफ 150 दिनों तक लागू रह सकते हैं। इसके बाद, कांग्रेस को इन टैरिफ को बढ़ाने के लिए वोट देना होगा। ट्रेड एक्सपर्ट्स के अनुसार, ट्रंप प्रशासन इन उपायों को खत्म होने दे सकता है और फिर से नए बैलेंस-ऑफ-पेमेंट संकट की घोषणा कर उन्हें फिर से लागू कर सकता है।

इस फैसले के बाद, US और भारत के बीच आगामी ट्रेड डील्स पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। चिदंबरम ने भारत सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि इस हालिया कानूनी फैसले का भारत-US ट्रेड डील पर क्या असर होगा और इस पूरे घटनाक्रम में भारतीय डेलीगेशन का अगला कदम क्या होगा।

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