New Delhi: पश्चिम एशिया में जारी संकट का असर अब भारत के उद्योगों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट के अनुसार, गैस और प्रोपेन की सप्लाई में बाधा के चलते सिरेमिक टाइल्स जैसे होम डेकोर प्रोडक्ट्स की कीमतों में तेजी आई है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि कतर से गैस सप्लाई प्रभावित होने के कारण टाइल्स निर्माताओं की लागत बढ़ गई है और उनके मुनाफे पर दबाव पड़ा है। इस बढ़ती लागत का असर अब बाजार में दिखने लगा है, जहां अधिकांश कंपनियां पहले ही करीब 5 प्रतिशत तक कीमतें बढ़ा चुकी हैं।
इतना ही नहीं, रिपोर्ट के मुताबिक कंपनियां आने वाले समय में कीमतों में 10 से 20 प्रतिशत तक और बढ़ोतरी पर भी विचार कर रही हैं, क्योंकि गैस की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। इस स्थिति ने बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है।
गैस संकट के बीच डिस्ट्रीब्यूटर्स में भी घबराहट देखने को मिल रही है। वे भविष्य की मांग को ध्यान में रखते हुए तेजी से स्टॉक जमा कर रहे हैं, जिससे फिलहाल मांग बढ़ी हुई नजर आ रही है। हालांकि, यदि यह संकट एक महीने से ज्यादा लंबा खिंचता है, तो सप्लाई पर असर पड़ सकता है और पहली तिमाही में उत्पादन व बिक्री प्रभावित हो सकती है।
दरअसल, सिरेमिक टाइल्स के निर्माण में प्राकृतिक गैस प्रमुख ईंधन के रूप में इस्तेमाल होती है, जिससे भट्टियों में उच्च तापमान बनाए रखा जाता है। ऐसे में गैस की कीमतों में बढ़ोतरी सीधे तौर पर टाइल्स की लागत और कीमत को प्रभावित करती है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह समस्या पूरे उद्योग को प्रभावित कर रही है, इसलिए उम्मीद है कि हालात सामान्य होने पर अगली तिमाही में बाजार में सुधार देखने को मिल सकता है। मांग और सप्लाई के संतुलन के साथ कंपनियां नुकसान की भरपाई कर सकती हैं।
इसके अलावा, भारतीय सिरेमिक उद्योग इस समय एक संरचनात्मक बदलाव के दौर से गुजर रहा है, लेकिन गैस संकट और निर्यात में सुस्ती जैसी चुनौतियां निकट भविष्य में उद्योग की रफ्तार को प्रभावित कर सकती हैं। खासतौर पर, सिरेमिक निर्यात का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा मिडिल ईस्ट से जुड़ा है, जहां मौजूदा तनाव का सीधा असर पड़ रहा है।
कुल मिलाकर, बढ़ती ऊर्जा लागत और सप्लाई में बाधा के कारण सिरेमिक टाइल्स उद्योग फिलहाल दबाव में है, जिसका असर कीमतों में बढ़ोतरी और संभावित सप्लाई संकट के रूप में सामने आ रहा है।



