क्यूबा में सोमवार को देशव्यापी ब्लैकआउट हो गया, जिससे लगभग 1.1 करोड़ लोग अंधेरे में डूब गए। ऊर्जा और खनन मंत्रालय के मुताबिक देश की पूरी बिजली प्रणाली अचानक ठप हो गई और पूरे द्वीप में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई।
ऊर्जा मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए बताया कि देश के बिजली ग्रिड में “पूरी तरह डिस्कनेक्शन” हो गया है। हालांकि उस समय संचालित हो रही बिजली इकाइयों में किसी तकनीकी खराबी की पुष्टि नहीं हुई है। मंत्रालय ने कहा कि इस बड़े ब्लैकआउट के कारणों की जांच की जा रही है।
बिजली विभाग के निदेशक लाजारो गुएरा ने सरकारी मीडिया को बताया कि तकनीकी टीमें कई थर्मोइलेक्ट्रिक प्लांट को दोबारा शुरू करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि बिजली बहाली की प्रक्रिया धीरे-धीरे की जाएगी ताकि कमजोर सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।
ब्लैकआउट के बाद राजधानी हवाना सहित कई शहरों में लोगों को मोमबत्तियों के सहारे रात गुजारनी पड़ी। हवाना निवासी यूनैसी सेसिलिया रिवियॉक्स ने बताया कि बिजली नहीं होने के कारण उन्हें बच्चों के लिए घर के अंदर ही गद्दे बिछाकर सोने की व्यवस्था करनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि उनके पास न तो रिचार्जेबल पंखा है और न ही कोई जनरेटर।
पिछले चार महीनों में यह क्यूबा में तीसरा बड़ा देशव्यापी ब्लैकआउट है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार बिजली कटौती से रोजमर्रा की जिंदगी बेहद कठिन हो गई है। हवाना के 61 वर्षीय निवासी टोमास डेविड वेलास्केज फेलिपे ने कहा कि बिजली की बार-बार कटौती से खाना खराब हो जाता है और बुजुर्गों के लिए हालात और भी मुश्किल हो गए हैं।
सरकारी मीडिया के मुताबिक सोमवार रात तक हवाना के करीब 5 प्रतिशत हिस्से में बिजली बहाल कर दी गई, जिससे लगभग 42 हजार उपभोक्ताओं को राहत मिली। साथ ही कई अस्पतालों में भी बिजली आपूर्ति फिर से शुरू की गई है। अधिकारियों ने कहा कि अगले चरण में संचार सेवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, हालांकि अभी बहाल की गई बिजली लाइनों के दोबारा फेल होने की आशंका भी बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि क्यूबा का पुराना और जर्जर बिजली ढांचा लगातार खराब होता जा रहा है, जिसके कारण रोजाना बिजली कटौती और बड़े पैमाने पर ब्लैकआउट की घटनाएं बढ़ रही हैं। वहीं क्यूबा सरकार ने इस संकट के लिए अमेरिका की ऊर्जा प्रतिबंध नीति को भी जिम्मेदार ठहराया है।















