अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वरिष्ठ सलाहकारों का मानना है कि अगर ईरान पर पहला हमला इजरायल की तरफ से किया जाए, तो यह अमेरिका के लिए राजनीतिक दृष्टिकोण से लाभकारी होगा। उनका कहना है कि इस कदम से अमेरिका को भविष्य में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए जनसमर्थन जुटाना आसान होगा।
सूत्रों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन के भीतर यह विचार किया जा रहा है कि यदि इजरायल अकेले और सबसे पहले ईरान पर हमला करता है और इसके जवाब में ईरान अमेरिका पर पलटवार करता है, तो अमेरिका के पास सैन्य कार्रवाई का ठोस और बड़ा कारण होगा।
इस विचार का प्रमुख तर्क यह है कि यदि अमेरिका या उसके सहयोगी देशों पर पहले हमला होता है, तो अमेरिकी जनता ईरान के खिलाफ पूर्ण युद्ध के लिए मानसिक रूप से तैयार हो जाएगी और इसे समर्थन देगी। सूत्रों के अनुसार, ट्रंप और उनके सलाहकारों के बीच यह बातचीत हो रही है कि ‘हमें ईरान पर बमबारी करनी है।’
हालांकि, इस योजना के साथ कई गंभीर रणनीतिक जोखिम भी जुड़े हुए हैं। एक प्रमुख चिंता यह है कि ईरान के साथ युद्ध से अमेरिकी हथियारों और गोला-बारूद के भंडार में भारी कमी आ सकती है। अमेरिका को डर है कि इस स्थिति का फायदा चीन उठा सकता है और ताइवान पर सैन्य हमला कर सकता है।
इसके अलावा, एक और महत्वपूर्ण चिंता अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा से जुड़ी है। सूत्रों ने बताया कि यदि अमेरिका ईरान पर हमला करता है, तो ईरान अपनी पूरी ताकत से जवाबी हमला करेगा। अमेरिका के कई सैन्य ठिकाने मध्य पूर्व में हैं, जो इजरायल की वायु रक्षा प्रणाली ‘आयरन डोम’ की सुरक्षा के दायरे में नहीं आते। इन ठिकानों पर हमला होने से अमेरिकी सैनिकों की जान जा सकती है, जो ट्रंप के लिए एक बड़ा राजनीतिक जोखिम हो सकता है।
इस बीच, जिनेवा में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ट्रंप के दूतों स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर से मुलाकात की हैं। इसे एक निर्णायक बैठक माना जा रहा है, जो तय करेगी कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच शांति समझौते की संभावना है या फिर अमेरिकी सैन्य हमले का खतरा बढ़ेगा।
इस बैठक में अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रोसी और ओमान के विदेश मंत्री सैय्यद बद्र बिन हमद अल बुसैदी भी शामिल हो सकते हैं। ‘द यरूशलेम पोस्ट’ के अनुसार, शांति समझौते की संभावना बहुत कम है, लेकिन इसे पूरी तरह नकारा भी नहीं किया जा सकता।
जिनेवा रवाना होने से पहले, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने कहा कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए जारी रखेगा और अमेरिका को चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने ईरान पर कोई हमला किया, तो अरब देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने ईरान के वैध लक्ष्य बन जाएंगे, और ईरान उन पर बिना किसी संकोच के हमला करेगा।



