West Bengal: आगामी विधानसभा चुनावों से पहले सियासी तापमान उच्च हो गया है। गुरुवार को केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राज्य में एक बड़ा कदम उठाया, जब राजनीतिक परामर्श फर्म आई-पैक के कार्यालय और इसके निदेशक प्रतीक जैन के ठिकानों पर छापेमारी की। इस छापेमारी ने राज्य में बड़ा सियासी हंगामा खड़ा कर दिया है।
बता दें, कोलकाता के साल्ट लेक स्थित गोदरेज वाटसाइड बिल्डिंग में आई-पैक के दफ्तर पर सुबह के समय छापेमारी की गई। इस दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी मौके पर पहुंच गईं और ईडी की कार्रवाई पर विरोध जताया। ममता ने इसे राजनीतिक प्रेरणा से की गई कार्रवाई और असंवैधानिक बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) से जुड़ी कई महत्वपूर्ण दस्तावेज़, जैसे उम्मीदवारों की सूची, हार्ड डिस्क और मोबाइल फोन जब्त करने का प्रयास किया।
ईडी के सूत्रों के अनुसार, यह छापेमारी कोयला घोटाले और उससे जुड़े धन शोधन मामले की जांच के तहत की गई है। जांच एजेंसी का कहना है कि उन्हें प्रतीक जैन और अन्य व्यक्तियों से जुड़े हवाला और नकद लेनदेन के बारे में विशिष्ट साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। ईडी ने कहा कि यह कार्रवाई पूरी तरह से कोयला घोटाले से अर्जित धन के संबंध में की गई है, और इसमें किसी भी तरह का राजनीतिक पहलू नहीं है।
बता दें, प्रतीक जैन, जो ‘इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी’ (आई-पैक) के सह-संस्थापक और निदेशक हैं, 2012 में डेलॉइट से करियर की शुरुआत की थी। बाद में वह ‘सिटिजन्स फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस’ के संस्थापक सदस्य बने, जो बाद में आई-पैक के रूप में बदल गया। जैन वर्तमान में तृणमूल कांग्रेस के आईटी प्रकोष्ठ के प्रमुख भी हैं।
वहीं, ईडी की छापेमारी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा 2020 में दर्ज की गई प्राथमिकी से जुड़ी है, जिसमें बंगाल के आसनसोल और अन्य क्षेत्रों में कोयले की चोरी के मामले का खुलासा हुआ था। आरोप है कि स्थानीय कोयला व्यापारी अनूप मांझी उर्फ लाला इस घोटाले में मुख्य संदिग्ध है।
बता दें, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि यह छापेमारी पूरी तरह से राजनीतिक बदले की भावना से की गई है। उन्होंने ईडी पर तृणमूल कांग्रेस की आंतरिक रणनीतियों, उम्मीदवारों की सूची और पार्टी से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों को कब्जे में लेने का आरोप लगाया। ममता ने सवाल किया कि क्या किसी राजनीतिक दल का डेटा इकट्ठा करना ईडी का काम है?
इस बीच, आई-पैक की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन इस घटनाक्रम से राज्य की राजनीति में उथल-पुथल मच गई है।
2021 के विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस की बड़ी जीत के बाद, आई-पैक का नाम चर्चा में आया था, जब उन्होंने टीएमसी के चुनावी अभियान में अहम भूमिका निभाई थी।
बता दें, ईडी की कार्रवाई और ममता का विरोध, दोनों ही पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक वातावरण को और भी गर्मा सकते हैं।













