नई रिसर्च से पता चला है कि कोलन पॉलीप्स के दो खास प्रकार — एडेनोमा और सेरेटेड पॉलीप्स — आंत के कैंसर का खतरा पांच गुना तक बढ़ा सकते हैं। यह अध्ययन फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी और फ्लिंडर्स मेडिकल सेंटर के शोधकर्ताओं ने किया और इसके नतीजे जर्नल क्लिनिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड हेपेटोलॉजी में प्रकाशित हुए हैं।

क्या हैं ये पॉलीप्स?

कोलन में पाए जाने वाले पॉलीप्स, जो आंत की अंदरूनी परत पर ग्रोथ के रूप में विकसित होते हैं, आमतौर पर बिनाइन (benign) होते हैं, यानी इनसे तुरंत कोई नुकसान नहीं होता। हालांकि, जब एडेनोमा और सेरेटेड पॉलीप्स जैसे खास प्रकार के पॉलीप्स होते हैं, तो ये समय के साथ आंत के कैंसर में बदल सकते हैं।

रिसर्च में क्या पाया गया?

रिसर्च के दौरान 8,400 से अधिक कोलोनोस्कोपी रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि जिन लोगों में एडेनोमा और सेरेटेड पॉलीप्स दोनों थे, उनमें कैंसर से पहले होने वाले बदलावों की संभावना 5 गुना ज्यादा थी। यह निष्कर्ष इस बात पर जोर देता है कि इन दोनों प्रकार के पॉलीप्स को एक साथ देखना कैंसर के खतरे को कई गुना बढ़ा सकता है।

क्यों जरूरी है कोलोनोस्कोपी?

डॉ. मोला वासी, जो इस स्टडी के प्रमुख लेखक हैं, ने कहा, “यह अध्ययन इस बात को साबित करता है कि एडेनोमा और सेरेटेड पॉलीप्स अलग-अलग कैंसर पाथवे को दिखाते हैं, जो एक ही समय में एक्टिव हो सकते हैं। इस कारण, इन्हें जल्दी पहचानना और नियमित कोलोनोस्कोपी करना बेहद जरूरी है।”

उन्होंने यह भी बताया कि सेरेटेड पॉलीप्स वाले लगभग आधे मरीज़ों में एडेनोमा भी पाया गया। यह दर्शाता है कि दोनों प्रकार के पॉलीप्स का संयोजन अक्सर और भी ज्यादा खतरे का कारण बनता है।

किसे ध्यान रखना चाहिए?

यह अध्ययन यह भी बताता है कि दाँतेदार (सेरेटेड) पॉलीप्स जल्दी कैंसर में बदल सकते हैं, जिससे स्क्रीनिंग और कोलोनोस्कोपी शेड्यूल की अहमियत बढ़ जाती है। 45 साल से ऊपर के लोग या जिनके परिवार में आंत की बीमारी का इतिहास है, उन्हें नियमित रूप से कोलोनोस्कोपी करवानी चाहिए।

अंत में, डॉ. वासी ने कहा कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, पॉलीप्स की संभावना भी बढ़ती जाती है। इसलिये, उन्हें जल्दी पकड़कर हटाना महत्वपूर्ण है।

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