नई दिल्ली: उन्नाव दुष्कर्म मामले में सजा काट रहे उत्तर प्रदेश के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से बहुत बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके तहत सेंगर की उम्रकैद की सजा पर रोक लगा दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद सेंगर की जेल से बाहर आने की उम्मीदों पर फिलहाल पानी फिर गया है।

SC ने जताई नाराजगी, रद्द किया हाईकोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा उम्रकैद पर रोक लगाने के फैसले को अनुचित मानते हुए उसे सिरे से खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस तरह के गंभीर मामलों में सजा पर रोक लगाने के ठोस आधार होने चाहिए।

2 महीने में नई सुनवाई का आदेश
शीर्ष अदालत ने केवल आदेश रद्द ही नहीं किया, बल्कि दिल्ली हाईकोर्ट को सख्त निर्देश भी दिया है। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट इस मामले में दो महीने के भीतर नए सिरे से सुनवाई करे और साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाए। जब तक हाईकोर्ट दोबारा फैसला नहीं लेता, तब तक सेंगर की उम्रकैद की सजा प्रभावी रहेगी।

क्या था मामला?
कुलदीप सिंह सेंगर को साल 2017 के उन्नाव रेप कांड में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद सेंगर ने इस सजा के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहाँ से उसे राहत मिल गई थी। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िता और अभियोजन पक्ष की दलीलों को सही मानते हुए सेंगर को दी गई राहत वापस ले ली है। इस फैसले को पीड़िता के संघर्ष की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।

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