वाराणसी। देशभर में होली का पर्व 4 मार्च को मनाया जाना है। धर्म की नगरी काशी में शुक्रवार को रंगभरी एकादशी से होली के महापर्व की शुरुआत हो गई है। वाराणसी में बाबा श्री काशी विश्वनाथ के गौना के साथ शुरू हुए होली के पर्व में भूत, पिशाच के साथ तांत्रिक और अघोरियों की होली विश्व प्रसिद्ध है। काशी के हरिश्चंद्र घाट स्थित महाश्मशान घाट पर धधकती हुई चिताओं के बीच अघोरी और तांत्रिकों ने चिताओं के भस्म से होली खेली। होली के इस इस अद्भुत नजारे को देखने और इसमें शामिल होने के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों से सैलानी पहुंचे। भूत पिशाच के रूप में सजे कलाकारों के साथ चिताओं के बीच अघोरी और तांत्रिकों की होली की एक झलक पाने के लिए सैलानी बेहद आतुर दिखे। सभी इस अनोखे पल को अपने कैमरे में कैद करते दिखे। चिताओं के भस्म की होली का खुमार खासकर युवा पीढ़ी पर देखने को मिला।

होली खेले मसाने के गीत पर जमकर झूमे विदेशी सैलानी, श्मशान घाट पर युवतियों ने किया डांस…
काशी के महाश्मशान हरिश्चंद्र घाट पर विश्व की सबसे अनोखी होली में शामिल होने के लिए पहुंचे विदेशी सैलानी होली के गीत पर जमकर डांस किया। होली खेले मसाने गीत बजते ही कलाकारों के साथ विदेशी सैलानी और युवतियों ने घाट पर डांस किया। काशी में होने वाली विश्व प्रसिद्ध मसाने की होली को लेकर आयोजक कपाली महाराज ने बताया कि मसाने की होली काशी में तांत्रिक और अघोरी सदियों से मनाते चले आ रहे है। हरिश्चंद्र घाट पर करीब 1987 से पहले मसाने की होली की शुरुआत हुई। पहले यह बेहद ही स्मित सीमित संसाधनों की वजह से मात्र कुछ तांत्रिक और अघोरियों के द्वारा मनाया जाता लेकिन बीते कुछ वर्षों में इसमें बड़ी संख्या में युवा आने लगे है।
पर्यटकों ने कहा विश्वास नहीं हुआ कि श्मशान घाट पर होती है होली…
काशी के महाश्मशान घाट पर जलती हुई चिताओं के पास भस्म की होली में शामिल होने पटना, मध्यप्रदेश, दिल्ली और कोलकाता सहित देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे सैलानियों में उत्साह और अचंभा देखने को मिला। सैलानियों ने बताया कि बीते कुछ सालों से सोशल मीडिया और न्यूज के माध्यम से श्मशान घाट पर होली की खबरों को देखा, लेकिन विश्वास नहीं हुआ कि काशी में कोई जलती हुई चिताओं के बीच चिताओं के राख से होली खेलता है, लेकिन केवल बनारस शहर में आकार यह विश्वास हुआ कि यह खबर बिल्कुल सत्य है और यही वजह है कि काशी को अद्भुत नगरी कहा जाता है। कोलकाता से आई सैलानी ने बताया कि इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए वह विशेष रूप से वाराणसी पहुंची हुई है और जो नजारा उन्होंने देखा उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ। वहीं ऑस्ट्रेलिया से सैलानी ने कहा कि उन्होंने होली कई स्थान पर देखा है, विगत वर्ष वह होली में शामिल होने के लिए वृंदावन में थे और इस बार वाराणसी में है। बनारस की मसाने की होली बेहद हो अनोखी और सबसे अलग है।


