उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर निगम से भ्रष्टाचार का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां विकास कार्यों में लूट के सारे रिकॉर्ड टूट गए हैं। पुलिस हिरासत में आए आरोपी ठेकेदार रज्जन बाजपेई और संदीप जैन ने पूछताछ के दौरान ऐसे सनसनीखेज खुलासे किए हैं, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। पूछताछ में पता चला है कि नगर निगम में अफसरों और ठेकेदारों की गहरी मिलीभगत से जनता के विकास के लिए आने वाले फंड की बड़े पैमाने पर लूट हो रही है।
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कानपुर नगर निगम में बड़ा भ्रष्टाचार का खुलासा, गिरफ्तार ठेकेदारों ने खोले राज़। नगर निगमों में भ्रष्टाचार ने सभी रिकॉर्ड तोड़े। विकास कार्यों में 60% तक की दलाली।
100 रुपये में सिर्फ 40 विकास कार्यों पर खर्च, 40% बाबू-अफसरों की जेब में, 20% ठेकेदार का कमीशन… pic.twitter.com/TSu7J5USAF— भारत समाचार | Bharat Samachar (@bstvlive) August 27, 2026
आरोपियों के मुताबिक, सरकारी खजाने से विकास कार्यों के लिए मिलने वाले हर 100 रुपये में से वास्तविक जमीन पर केवल 40 रुपये ही खर्च किए जाते हैं। बाकी के 60 फीसदी हिस्से की भारी-भरकम दलाली बांटी जाती है। इस पूरे गणित के तहत 40 रुपये नगर निगम के लेखाकारों, इंजीनियरों, बड़े अधिकारियों और राजनीतिक रसूख वाले लोगों की जेब में जाते हैं, जिनकी हिस्सेदारी अलग-अलग स्तर पर तय होती है। वहीं, शेष 20 फीसदी कमीशन खुद ठेकेदार अपने पास रख लेते हैं।
जांच के दौरान पुलिस के हाथ एक बेहद अहम ‘कमीशन लिस्ट’ भी लगी है। सूत्रों के मुताबिक, इस सूची में निचले स्तर के बाबुओं से लेकर बड़े अधिकारियों और नेताओं तक के नाम उनके तय कमीशन प्रतिशत के साथ दर्ज हैं। माना जा रहा है कि यह गुप्त सूची जल्द ही एसआईटी (SIT) को सौंपी जाएगी। अगर इस लिस्ट के नाम और आंकड़े सार्वजनिक होते हैं, तो कई बड़े चेहरे पुलिस और जांच एजेंसियों की सीधी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।













