अदाणी ग्रुप के युवा उद्योगपति करण अदाणी ने कहा है कि उनके नेतृत्व की सोच और निर्णय लेने का तरीका काफी हद तक घर से मिली सीख से प्रभावित है। उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता गौतम अदाणी और डॉ प्रीति अदाणी से मिले जीवन मूल्यों ने उनके नेतृत्व के दृष्टिकोण को आकार दिया है।
नई दिल्ली में आयोजित एक लीडरशिप समिति में बोले हुए करण अदाणी ने कहा कि अदाणी ग्रुप के पदाधिकारियों गौतम अदानी का काम करने का तरीका, अनुशासन और उपलब्धियों की भावना उनके लिए हमेशा प्रेरणा रही है। उन्होंने बताया कि बचपन से ही उन्होंने अपने पिता को जबड़े का सामना करते हुए भविष्य पर भरोसा बनाए रखा देखा है।
करण अदाणी ने एक दिलचस्प किस्सा साझा करते हुए बताया कि एक बार रात करीब 1 बजे उनके पिता का फोन आया और उन्होंने पूछा कि क्या वह सो रहे हैं। जब उन्होंने हां कहा तो गौतम अदाणी ने उन्हें बताया कि नेतृत्व का मतलब अक्सर जिम्मेदारी के समय हमेशा उपलब्ध रहना होता है। इस घटना ने उन्हें यह समझाया कि नेतृत्व में दायित्व और जुड़ाव बेहद जरूरी है।
उन्होंने यह भी बताया कि अपने पिता के व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद परिवार के लिए समय निकालना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। करण अदाणी ने मुस्कुराते हुए कहा कि उनके पिता की व्यस्तता संभालने वालों को भी तीन लोग कभी भी रोक सकते हैं—उनकी तीन पोटियां।
करण अदाणी ने अपनी मां डॉ. प्रीति अदाणी के सामाजिक कार्यों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अदाणी फाउंडेशन के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के क्षेत्र में किए जा रहे कामों को देखकर उन्हें यह समझ आया कि किसी भी व्यवसाय की सफलता का असली मतलब समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालना भी है।
उन्होंने कहा कि उनके पिता से उन्हें बड़े स्तर पर काम करने का आत्मविश्वास मिला, जबकि उनकी मां ने उन्हें संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का महत्व सिखाया। करण अदाणी के अनुसार तेज़ी और विस्तार किसी भी व्यवसाय के लिए जरूरी हैं, लेकिन उसके साथ सहानुभूति और सामाजिक जिम्मेदारी भी उतनी ही अहम होती है।
उन्होंने अपने विचारों को समेटते हुए कहा कि व्यवसाय संपत्तियां बना सकते हैं, लेकिन असली संस्थान मूल्यों से बनते हैं। यही सीख उन्हें अपने परिवार से मिली है और वही अदानी समूह की कार्य संस्कृति की आधारशिला भी है।



