The fear of aging can also make you age faster, a shocking new study reveals. उम्र बढ़ना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन अगर कोई व्यक्ति लगातार उम्र बढ़ने के डर में जीता है तो इसका असर उसके शरीर पर भी पड़ सकता है। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी (NYU) की एक नई रिसर्च में सामने आया है कि उम्र बढ़ने को लेकर ज्यादा चिंता करना शरीर में जैविक स्तर पर उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर सकता है।

यह अध्ययन 700 से अधिक महिलाओं पर किया गया, जिसमें पाया गया कि जो महिलाएं भविष्य में होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर ज्यादा चिंतित रहती हैं, उनके शरीर में बायोलॉजिकल एजिंग के संकेत तेजी से दिखाई देते हैं। शोधकर्ताओं ने इसे मापने के लिए आधुनिक “एपिजेनेटिक क्लॉक” तकनीक का इस्तेमाल किया, जो शरीर की कोशिकाओं में होने वाले बदलावों के आधार पर जैविक उम्र का अनुमान लगाती है।

सेहत को लेकर चिंता का सबसे ज्यादा असर

रिसर्च में पाया गया कि उम्र बढ़ने के साथ खराब सेहत की चिंता का संबंध सबसे ज्यादा तेज जैविक उम्र बढ़ने से जुड़ा हुआ था। इसके विपरीत, सुंदरता या प्रजनन क्षमता से जुड़ी चिंताओं का शरीर पर ऐसा स्पष्ट जैविक प्रभाव नहीं देखा गया।

इस स्टडी की प्रमुख शोधकर्ता और NYU स्कूल ऑफ ग्लोबल पब्लिक हेल्थ की पीएचडी छात्रा के अनुसार, उम्र बढ़ने से जुड़ी चिंता सिर्फ मानसिक समस्या नहीं है, बल्कि इसका असर शरीर की कोशिकाओं पर भी पड़ सकता है। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति के मानसिक अनुभव भी उसके शरीर की जैविक उम्र को प्रभावित कर सकते हैं।

क्यों ज्यादा चिंता करती हैं महिलाएं

शोध के अनुसार महिलाएं उम्र बढ़ने को लेकर ज्यादा संवेदनशील हो सकती हैं। इसके पीछे सामाजिक दबाव, सुंदरता से जुड़ी अपेक्षाएं और प्रजनन क्षमता को लेकर चिंता जैसे कारण शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा मिडल एज में कई महिलाओं पर परिवार और बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल की जिम्मेदारी भी होती है, जिससे तनाव बढ़ सकता है।

जब महिलाएं अपने परिवार के बुजुर्गों को बीमार या कमजोर होते देखती हैं, तो उन्हें भविष्य में खुद के साथ भी ऐसा होने का डर सताने लगता है। यही डर धीरे-धीरे मानसिक तनाव में बदल सकता है।

कैसे की गई स्टडी

इस शोध के लिए वैज्ञानिकों ने MIDUS (Midlife in the United States) नाम की एक बड़ी स्टडी में शामिल 726 महिलाओं के डेटा का विश्लेषण किया। प्रतिभागियों से यह पूछा गया कि उन्हें उम्र बढ़ने से जुड़ी किन बातों को लेकर चिंता होती है — जैसे कम आकर्षक दिखना, स्वास्थ्य समस्याएं या अधिक उम्र में मां बनने की संभावना खत्म होना।

इसके साथ ही उनके ब्लड सैंपल का विश्लेषण दो अलग-अलग एपिजेनेटिक क्लॉक तकनीकों से किया गया। इनमें से एक तकनीक शरीर में उम्र बढ़ने की रफ्तार मापती है, जबकि दूसरी समय के साथ जमा होने वाले जैविक नुकसान का अनुमान लगाती है।

मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का गहरा संबंध

स्टडी के वरिष्ठ लेखक और NYU के प्रोफेसर एडोल्फो क्यूवास के मुताबिक, यह शोध इस बात को उजागर करता है कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। उम्र बढ़ने की चिंता एक ऐसा मनोवैज्ञानिक कारक है जिसे समझकर और नियंत्रित करके उम्र बढ़ने की प्रक्रिया पर भी असर डाला जा सकता है।

हालांकि शोधकर्ताओं ने यह भी कहा कि यह अध्ययन केवल एक समय बिंदु पर आधारित है, इसलिए यह निश्चित रूप से कारण और परिणाम का संबंध स्थापित नहीं करता। इसके अलावा धूम्रपान या शराब जैसी आदतें भी इस संबंध को प्रभावित कर सकती हैं।

आगे और रिसर्च की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझने के लिए और शोध की जरूरत है कि उम्र बढ़ने का डर लंबे समय में शरीर की जैविक उम्र को किस तरह प्रभावित करता है और लोगों को इस चिंता से बेहतर तरीके से कैसे निपटने में मदद की जा सकती है।

शोधकर्ताओं के अनुसार उम्र बढ़ना एक सार्वभौमिक अनुभव है और समाज को इस विषय पर खुलकर बातचीत करनी चाहिए ताकि लोग इस प्रक्रिया को सकारात्मक तरीके से स्वीकार कर सकें।

विदेश में जिसका डंका बजता था अब क्या हुआ, Israel-Iran युध्य के बीच कांग्रेस प्रवक्ता का बड़ा हमला

शेयर करना
Exit mobile version