उन्नाव के सोहरामऊ थाना क्षेत्र के रसूलपुर गांव में कथावाचक के साथ कथित रूप से मारपीट और अपमान का गंभीर मामला सामने आया है। कथावाचक अवधेश चंद्र ने आयोजकों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि भागवत कथा समाप्त होने के बाद उनके साथ न सिर्फ मारपीट की गई, बल्कि उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित भी किया गया। पीड़ित कथावाचक का आरोप है कि कथा समाप्त होने के बाद आयोजकों ने उनकी जाति पूछकर उनके साथ दुर्व्यवहार किया।
कथावाचक ने आरोप लगाया कि रसूलपुर गांव निवासी अनूप द्विवेदी और मनीष पांडेय सहित अन्य लोगों ने पहले उन्हें गाड़ी में बैठाकर लखनऊ ले गए, जहां मेरे साथ मारपीट की गई। अमानवीय व्यवहार किया गया, जनेऊ तोड़े गए और अपमानजनक कृत्य किया गया पेशाब पिलाया।
घटना के बाद पीड़ित कथावाचक ने पुलिस अधीक्षक (SP) को प्रार्थना पत्र देकर न्याय की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के आदेश पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। सोहरामऊ पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। वहीं, सामाजिक स्तर पर भी इस मामले की चर्चा तेज हो गई है। यह मामला न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है, बल्कि सामाजिक सौहार्द को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा कर रहा है।
इटावा में जाति पूछ कर साधू को पीटा गया था
उत्तर प्रदेश के जनपद इटावा के थाना बकेवर क्षेत्र के दान्दरपुर गांव में भागवत कथा के दौरान कथावाचक और उनके सहयोगियों के साथ अमानवीय व्यवहार का मामला सामने आया था। मुकुटमणि अपने साथियों के साथ गांव में भागवत कथा करने पहुंचे थे। पहले दिन कलश स्थापना के बाद भोजन के समय कथावाचक की जाति को लेकर सवाल उठाया गया। इसके बाद कुछ ग्रामीणों ने कहा कि तुम यादव और अनुसूचित जाति से हो, ऐसे में कथा कैसे कर सकते हो। इसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया। इसके बाद कथावाचक और उनकी टीम को ग्रामीणों ने घेर लिया और उनके बाल कटवा दिए, नाक रगड़वाई गई तथा कथित रूप से क्षेत्र की शुद्धि भी कराई गई।











