उत्तराखंड के युवाओं के लिए वैश्विक स्तर पर रोजगार के नए रास्ते खुलते दिखाई दे रहे हैं। राज्य सरकार की दूरगामी सोच और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की विशेष पहल से प्रदेश के नौजवान अब विदेशी धरती पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। ‘मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना’ के माध्यम से पहाड़ के युवाओं का विदेशों में सम्मानित नौकरी पाने का सपना सच हो रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस योजना के जरिए अब तक प्रदेश के 106 युवाओं को विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संस्थानों और कंपनियों में रोजगार मिल चुका है। युवाओं को दुनिया की जरूरतों के हिसाब से तैयार करने के लिए सबसे पहले उनके कौशल को निखारा जा रहा है। इसके तहत राज्य में विदेशी भाषाओं का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि भाषा की वजह से हमारे युवाओं के कदम न ठिठकें।
वर्तमान में उत्तराखंड में जर्मन और जापानी भाषा सिखाने के लिए कुल 158 प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। देहरादून, अल्मोड़ा और बागेश्वर जैसे जिलों में इन भाषाओं के अलग-अलग बैच चल रहे हैं। जल्द ही उत्तरकाशी और टिहरी जनपदों में भी ऐसे नए केंद्र शुरू करने की तैयारी की जा रही है। योजना के प्रभावी संचालन के लिए बाकायदा एक ‘विदेश रोजगार प्रकोष्ठ’ का गठन किया गया है, जो युवाओं को गाइड करने से लेकर अवसरों की तलाश तक पूरी मदद करता है।
इस योजना की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जापान में 75, सऊदी अरब में 30 और जर्मनी में 1 युवा को हेल्थ, हॉस्पिटेलिटी और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में नौकरियां मिल चुकी हैं। यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।
उत्तराखंड सरकार अब जमैका, इथियोपिया और जाम्बिया जैसे अन्य देशों में भी रोजगार की संभावनाएं तलाश रही है। हाल ही में मुख्यमंत्री धामी ने इन देशों में भारत के उच्चायुक्तों और राजदूतों के साथ बैठक कर कुशल मानव संसाधन की मांग पर गहन चर्चा की है। आने वाले दिनों में इन देशों की जरूरतों के मुताबिक भी राज्य के युवाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
जब स्थानीय युवाओं को सही मार्गदर्शन और ट्रेनिंग मिलती है, तो वे न केवल अपने परिवार की स्थिति सुधारते हैं बल्कि पूरे प्रदेश का नाम भी रोशन करते हैं। सरकार का यह प्रयास युवाओं के आत्म-विश्वास को बढ़ाने और पलायन रोकने की दिशा में एक सकारात्मक कदम साबित हो रहा है।












