वर्ल्ड न्यूज़ : इज़राइल डिफेंस फोर्सेज़ (IDF) ने बुधवार को ईरान और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के खिलाफ अपने चल रहे मिलिट्री अभियान के बारे में जानकारी दी। IDF के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने बताया कि US सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के साथ मिलकर चलाए जा रहे ऑपरेशन के तहत अब तक 4,000 से ज़्यादा टारगेट पर हमला किया गया और 10,000 से अधिक आतंकियों को निशाना बनाया गया।
IDF ने दावा किया कि अभियान में “मास्टर टेररिस्ट अली खामेनेई को खत्म कर दिया गया” और एक इज़राइली एयरफाइटर ने ईरानी एयरस्पेस में एक ईरानी एयरक्राफ्ट को मार गिराया। इसके अलावा, हिज़्बुल्लाह के खिलाफ़ तेज़ ऑपरेशन भी किए गए, जिनमें एयरस्ट्राइक और लेबनान में ज़मीनी एंट्री शामिल थी।
प्रवक्ता ने ऑपरेशनल डिटेल्स साझा करते हुए कहा कि 800 से ज़्यादा स्ट्राइक की गईं और पूरे ईरान में लगभग 16,000 हथियार गिराए गए। उन्होंने बताया कि ईरानी शासन से जुड़े 2,000 से ज़्यादा सैनिक और कमांडर मारे गए, जबकि 5,000 नए टारगेट की पहचान की गई।
IDF ने यह भी कहा कि एयर फ़ोर्स ने 24 घंटे से कम समय में तेहरान के बीचों-बीच रास्ता बना लिया और केवल 40 सेकंड में लगभग 40 सीनियर ईरानी अधिकारियों को निशाना बनाया गया। प्रवक्ता ने दोहराया कि इज़राइल और उसके सहयोगी ईरानी सरकार और प्रॉक्सी को देश और नागरिकों के लिए खतरा नहीं बनने देंगे।
US सेंट्रल कमांड ने भी पुष्टि की कि अमेरिकी फोर्स ने ईरान के अंदर अंडरग्राउंड मिलिट्री टारगेट पर सटीक हमले किए हैं। CENTCOM ने कहा कि इसका उद्देश्य ईरानी सरकार की सीमाओं के बाहर ताकत दिखाने की क्षमता को कम करना है।
इस अभियान की “बड़ी कामयाबी” की तारीफ़ करते हुए इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इज़राइल-US की मिली-जुली कोशिशें तेहरान सरकार को “सिस्टमेटिक तरीके से कुचल” रही हैं और यहूदियों के देश के लिए खतरे को भी खत्म कर रही हैं। नेतन्याहू ने पासओवर त्योहार के मौके पर कहा, “जल्द या बाद में ईरानी सरकार गिर जाएगी।” उन्होंने इज़राइल द्वारा क्षेत्रीय देशों के साथ नए गठबंधन बनाने की भी जानकारी दी।
वहीं, ईरानी प्रेस टीवी के मुताबिक, ईरान की इस्लामिक रेवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4 के तहत US और इज़राइली ठिकानों पर चार हमले किए। इनमें फ़ारस की खाड़ी में इज़राइल के कंटेनर जहाज़ एक्सप्रेस हाफ़ॉन्ग पर बैलिस्टिक मिसाइल हमला और UAE तट पर अमेरिकी ठिकाने पर ड्रोन हमला शामिल है। साथ ही, ईरान ने US की पांचवीं फ़्लीट के काउंटर-ड्रोन सिस्टम को भी नष्ट किया।



