तेहरान: ईरान के राजनीतिक और धार्मिक इतिहास में एक बड़ा बदलाव आया है। देश की सर्वोच्च नियुक्ति करने वाली संस्था ‘मजलिस-ए-ख़ुब्रेगान’ (Assembly of Experts) की आपात बैठक में ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। आयतुल्लाह सैयद मुज्तबा हुसैनी खामेनेई को इस्लामी गणराज्य ईरान का तीसरा सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) चुन लिया गया है।
कौन हैं नए सुप्रीम लीडर?
आयतुल्लाह सैयद मुज्तबा हुसैनी खामेनेई ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई के बेटे हैं। लंबे समय से उन्हें सुप्रीम लीडर पद का संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा था। वह ईरान की राजनीति में एक प्रभावशाली शख्सियत रहे हैं और धार्मिक मामलों में गहरी पकड़ रखते हैं।
कैसे लिया गया फैसला?
विशेषज्ञों की परिषद (Assembly of Experts) की आपात बैठक बुलाई गई, जिसमें बहुमत के निर्णायक मत से यह ऐतिहासिक फैसला लिया गया। परिषद ने आधिकारिक तौर पर मुज्तबा खामेनेई को देश की सर्वोच्च धार्मिक-राजनीतिक सत्ता संभालने के लिए नामित कर दिया है।
क्या होगा असर?
ईरान को नए सुप्रीम लीडर मिलने से पूरे मध्य-पूर्व की राजनीति पर गहरा असर पड़ सकता है। ईरान इस समय पश्चिम एशिया में कई मोर्चों पर सक्रिय है। अमेरिका और इजरायल के साथ तनाव के बीच यह बदलाव अहम माना जा रहा है।
ईरान के सुप्रीम लीडर का इतिहास:
- आयतुल्लाह रूहुल्लाह खोमैनी (1979-1989) – इस्लामी क्रांति के बाद पहले सुप्रीम लीडर
- आयतुल्लाह अली खामेनेई (1989-2026) – करीब 37 साल तक देश की सत्ता संभाली
- आयतुल्लाह सैयद मुज्तबा हुसैनी खामेनेई (2026 से अब तक) – तीसरे सुप्रीम लीडर
नए सुप्रीम लीडर के सामने कई चुनौतियां होंगी – पश्चिमी देशों के साथ संबंध, परमाणु समझौता, आर्थिक मोर्चे पर मंदी और क्षेत्रीय तनाव। देखना होगा कि नई नेतृत्व में ईरान की नीतियां किस दिशा में जाती हैं।















