ईरान, जो पहले तक अपनी सैन्य ताकत पर गर्व करता था, अब अमेरिका और इजरायल के खिलाफ युद्ध के मैदान में अकेला पड़ता हुआ नजर आ रहा है। ईरान ने इजरायल समेत मध्य पूर्व के 9 देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला करके भारी तबाही मचाई। इस कार्रवाई के बाद, न केवल खाड़ी देशों ने, बल्कि NATO देशों, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने भी ईरान की आलोचना की है।
यह हमले खाड़ी देशों के लिए पहले से ही चिंता का विषय बन चुके हैं। ईरान की कार्रवाई से ये देश पहले से ही ईरान के विरोध में खड़े थे और अब स्थिति और भी गंभीर हो गई है।
ईरान का अलग-थलग पड़ना
ईरान ने अपने इस कदम से न केवल अमेरिका और इजरायल के खिलाफ संघर्ष को बढ़ावा दिया, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी स्थिति को कमजोर किया है। अमेरिका, ब्रिटेन, बहरीन, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और यूएई ने मिलकर एक संयुक्त बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि वे अपने नागरिकों, संप्रभुता और क्षेत्र की रक्षा में एकजुट खड़े हैं और ईरान के हमलों के खिलाफ आत्मरक्षा के अपने अधिकार को दोहराते हैं।
युद्ध का दायरा बढ़ने की आशंका
ईरान की कार्रवाई के कारण युद्ध का दायरा बढ़ता नजर आ रहा है। अब देखना यह होगा कि वैश्विक समुदाय और क्षेत्रीय शक्तियां इस स्थिति को कैसे नियंत्रित करती हैं। ईरान के खिलाफ संयुक्त बयान से साफ है कि अब यह संघर्ष केवल ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच नहीं रहेगा, बल्कि यह कई देशों की सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।













