हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च, गुरुवार से हो रही है। इसी दिन घटस्थापना के साथ मां दुर्गा की पूजा का शुभारंभ होगा। इस बार नवरात्रि की सबसे खास बात यह है कि मां दुर्गा का आगमन और विदाई दोनों ही हाथी पर माना जा रहा है, जिसे ज्योतिष और धर्म के अनुसार अत्यंत शुभ संकेत माना जाता है।
बता दें, धार्मिक मान्यता है कि नवरात्रि जिस वार से शुरू होती है, उसी के आधार पर माता का वाहन निर्धारित होता है। गुरुवार से नवरात्रि शुरू होने के कारण मां दुर्गा का आगमन गज यानी हाथी पर माना गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह संयोग सुख, समृद्धि और शांति का प्रतीक होता है।
वहीं, नवरात्रि की शुरुआत चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों—मां शैलपुत्री, ब्रह्माचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा का विशेष महत्व होता है।
बता दें, पहले दिन विधि-विधान से कलश स्थापना की जाती है और मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। श्रद्धालु पूरे नौ दिनों तक व्रत रखते हैं और नियमित रूप से पूजा-अर्चना कर मां का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
इस वर्ष 26 मार्च को अष्टमी और नवमी तिथि का संयोग एक ही दिन पड़ रहा है। इसी दिन कन्या पूजन, हवन और राम नवमी का पर्व भी मनाया जाएगा। नवरात्रि के अंतिम दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है, जिसमें छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनका सम्मान किया जाता है।
नवरात्रि के दौरान घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई रखना, जौ बोना, कलश स्थापना करना, दीप जलाना और दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करना शुभ माना जाता है।
चैत्र नवरात्रि के ये नौ दिन श्रद्धा, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर होते हैं, जो जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करते हैं।













