Indian Railways land Revenue. भारतीय रेलवे ने वित्त वर्ष 2024-25 में अपनी ज़मीन संपत्ति के वाणिज्यिक उपयोग से ₹3,129 करोड़ की कमाई की है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 16% अधिक है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह जानकारी संसद में बुधवार को दी। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में रेलवे की भूमि से हुई आय में 21.5% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दर्ज की गई है।

कमाई का स्रोत, लेकिन कम योगदान

रेल मंत्री ने बताया कि रेलवे के पास कुल 4.9 लाख हेक्टेयर जमीन है, लेकिन उसमें से केवल 1% (करीब 4,930 हेक्टेयर) ही वाणिज्यिक उपयोग में है। इस जमीन का इस्तेमाल Rail Land Development Authority (RLDA) के माध्यम से होता है।

फिर भी, रेलवे की कुल आय में ज़मीन और विज्ञापन जैसे अन्य स्रोतों से महज 1.1% हिस्सा ही आता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर रेलवे अपनी 5-10% जमीन का भी व्यावसायिक उपयोग करे, तो इससे आय कई गुना बढ़ाई जा सकती है और ऑपरेशनल प्रदर्शन में भी सुधार होगा।

विशेषज्ञ बोले – हांगकांग और जापान जैसा मॉडल अपनाए भारत

पूर्व महाप्रबंधक, ईस्ट सेंट्रल रेलवे ललित चंद्र त्रिवेदी ने कहा – “अगर रेलवे अपनी भूमि का बेहतर तरीके से दोहन करे, जैसे हांगकांग की MTR और जापान की JR East करती हैं, तो रेल संचालन के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाए जा सकते हैं।”

RLDA की धीमी रफ्तार और बाधाएं

RLDA को 90 रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन सिर्फ 2 स्टेशन ही पूर्ण हो सके हैं। साथ ही, 157 वाणिज्यिक साइट्स को विकसित करने का कार्य सौंपा गया, लेकिन सभी अभी भी योजना और विकास के अलग-अलग चरणों में हैं।

प्रमुख अड़चनें:

  • राज्य सरकार और स्थानीय निकायों से समन्वय की प्रक्रिया धीमी
  • विकास योजनाओं को स्वीकृति मिलने में समय
  • कई निजी डेवलपर्स द्वारा लीज भुगतान न कर पाने के चलते अनुबंध रद्द

निजी क्षेत्र की भागीदारी की सिफारिश

2023 में संसदीय स्थायी समिति ने सुझाव दिया था कि रेलवे को प्राइवेट पार्टनरशिप को प्रोत्साहित करना चाहिए और यात्री संख्या, संपर्क सुविधा और रणनीतिक महत्व के आधार पर पुनर्विकास को चरणबद्ध तरीके से करना चाहिए।

विशेषज्ञों के मुताबिक, “शहरी इलाकों की जमीनों पर ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवेलपमेंट (TOD) की भारी संभावना है। रेलवे को एक अलग ‘लैंड मॉनेटाइजेशन अथॉरिटी’ बनानी चाहिए जिसमें विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय सुनिश्चित हो।”

कितनी जमीन असल में खाली है?

रेलवे के पास 62,068 हेक्टेयर जमीन खाली है, लेकिन उसमें से भी 60-70% जमीन पटरी के किनारे संकरी पट्टियों में है, जो विभिन्न ऑपरेशनल उपयोगों में आती है।

School Merger पर योगी सरकार ने लिया यूटर्न तो Sanjay Singh ने किया ऐलान, "आंदोलन अभी जारी रहेगा"

शेयर करना
Exit mobile version