यूजीसी के हालिया नियमों को लेकर देशभर में बहस छिड़ी हुई है. देश के कई हिस्सों में इसे लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहा है. यूजीसी के खिलाफ कई जगहों पर एक स्वर में आवाज उठाई जा रही है. बता दें कि यूजीसी ने हाल ही में “प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टिट्यूशन रेगुलेशंस 2026” जारी किया है, जिसका उद्देश्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में भेदभाव को समाप्त करना है.लेकिन, जनरल कैटेगरी यानी सवर्ण वर्ग के लोग इसे उनके खिलाफ बताते हुए विरोध कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर #RollbackUGC ट्रेंड कर रहा है और यह आरोप लगाया जा रहा है कि इन नियमों से विश्वविद्यालयों में वातावरण दूषित होगा और छात्रों के बीच विभाजन पैदा होगा.
नए नियमों के तहत अब एससी, एसटी के अलावा ओबीसी वर्ग के छात्र, कर्मचारी और शिक्षक भी जातिगत भेदभाव की शिकायत कर सकते हैं. पहले के नियमों में केवल एससी-एसटी छात्र शामिल थे, जबकि ओबीसी को इससे बाहर रखा गया था.इस बदलाव के कारण विरोध बढ़ गया है.
इसमें यह भी कहा गया है कि सभी उच्च शिक्षा संस्थानों को समानता समिति बनानी होगी, जिसमें एससी, एसटी, ओबीसी और महिलाओं के प्रतिनिधि होंगे.इसके अलावा, भेदभाव की शिकायतों पर 24 घंटे में कार्रवाई शुरू हो जाएगी और 60 दिन के भीतर जांच पूरी करनी होगी.
इस हंगामे के साथ-साथ सवर्ण समुदाय का कहना है कि इन नियमों से उन्हें झूठे आरोपों का शिकार बनाया जा सकता है, जिससे समाज में और भेदभाव बढ़ेगा.वहीं, दूसरा पक्ष तर्क देता है कि अगर जातिगत भेदभाव नहीं है तो डर किस बात का?














