मऊ: उत्तर प्रदेश के मऊ में हत्या के एक मामले में सजा से बचने के लिए फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने का मामला सामने आया है। शहर कोतवाली पुलिस ने रविवार को इस मामले में राजू उर्फ राजकुमार राजभर को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने खुद को मृत घोषित कराने के लिए बकरे का दाह संस्कार कराया और श्मशान घाट से जारी प्रमाण पत्र के आधार पर नगर पालिका से अपना फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया। इसके बाद इसे अदालत में दाखिल कर दिया। पुलिस की जांच में साजिश में शामिल दो होम्योपैथिक डॉक्टरों के नाम भी सामने आए हैं, जिनकी तलाश की जा रही है।
हत्या के मामले में सजा से बचने के लिए रची साजिश
अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार ने शहर कोतवाली सभागार में पत्रकारों को बताया कि शहर कोतवाली क्षेत्र के ख्वाजाजहांपुर निवासी राजू उर्फ राजकुमार राजभर मुंबई में रहकर मजदूरी करने के साथ ट्रेडिंग का काम करता था। वापस आने के बाद उसने कई लोगों के रुपये ट्रेडिंग में लगाए थे।
इसी बीच वर्ष 2016 में दोहरीघाट थाना क्षेत्र के नगरीपार गांव निवासी योगेश सिंह की रुपयों के विवाद में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि राजू और उसके साथी ने मुंशीपुरा पुल के नीचे इस वारदात को अंजाम दिया था।
मामले में जमानत पर छूटने के बाद राजू दो होम्योपैथिक डॉक्टरों के रुपये ट्रेडिंग में लगाकर उन्हें मुनाफा दे रहा था। कुछ समय बाद उसने दोनों डॉक्टरों को बताया कि हत्या के मामले में उसे नामजद किया गया है और अदालत में सुनवाई पूरी होने के बाद उसे सजा हो सकती है।
दो डॉक्टरों के साथ मिलकर बनाया फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र
पुलिस के मुताबिक, हत्या के मामले में जेल जाने पर ट्रेडिंग में लगे रुपये फंसने की आशंका के चलते दोनों डॉक्टर भी कथित साजिश में शामिल हो गए। उन्होंने राजू को सजा से बचाने के लिए उसे मृत घोषित कराने और मृत्यु प्रमाण पत्र अदालत में दाखिल करने का उपाय सुझाया।
आरोप है कि दोनों डॉक्टरों ने राजू को बेहोश कर अस्पताल में भर्ती कराया और उसे मृत घोषित करवा दिया। इसके बाद कथित तौर पर बकरे के शव का इस्तेमाल कर मृत्यु का फर्जी प्रमाण तैयार करने की योजना को अंजाम दिया गया।
बकरे का दाह संस्कार कर श्मशान घाट से लिया प्रमाण पत्र
एएसपी अनूप कुमार के अनुसार, आरोपियों ने टिकठी सजाने के बाद उस पर मृत बकरे को रखा और 30 मई 2025 को गाजीपुर के श्मशान घाट पहुंचे। वहां बकरे का दाह संस्कार किया गया।
इसके बाद श्मशान घाट से जारी प्रमाण पत्र के आधार पर नगर पालिका से राजू का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया गया। आरोप है कि इस फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र को अदालत में दाखिल कर दिया गया, ताकि हत्या के मामले में सजा से बचा जा सके।
भेष बदलकर रहने लगा आरोपी, ट्रेडिंग में लगाता रहा रुपये
पुलिस के मुताबिक, मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के बाद राजू भेष बदलकर रहने लगा। इस दौरान वह दोनों डॉक्टरों के संपर्क में रहा और उनके रुपये ट्रेडिंग में लगाता रहा।
मामले की जानकारी सामने आने के बाद शहर कोतवाली पुलिस ने उपनिरीक्षक अनिल द्विवेदी की तहरीर पर केस दर्ज किया। रविवार को पुलिस ने राजू उर्फ राजकुमार राजभर को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ के दौरान कथित साजिश में शामिल दो होम्योपैथिक डॉक्टरों के नाम भी सामने आए हैं। पुलिस अब दोनों की तलाश में जुटी है।













