उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने निर्वाचन आयोग (EC) के कामकाज और अंदरूनी मतभेदों की खबरों को लेकर तीखा हमला बोला है। अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की खबरें आने का सीधा मतलब यह है कि आयोग अपनी जिम्मेदारी और निष्पक्षता से काम नहीं कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि दो चुनाव आयुक्तों ने कई मामलों पर कड़ी आपत्तियां जताई हैं और गलत निर्णयों पर कुल 14 बार आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं।
ये एक बेहद गंभीर समाचार है कि पिछले 10 महीनों में 2 चुनाव आयुक्तों ने निर्वाचन आयोग के गलत निर्णयों पर 14 बार अपनी आपत्ति दर्ज़ कराई है।
इसका सीधा मतलब ये है कि सभी चुनाव आयुक्त अपना सही काम नहीं कर पा रहे हैं। एक स्वतंत्र निकाय के सदस्यों को अगर न्यायपूर्ण कार्य करने की… pic.twitter.com/UoQnYWsWd8
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) September 23, 2026
सपा प्रमुख ने इस स्थिति को देश के लोकतंत्र के लिए बेहद घातक और खतरनाक करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग के सदस्यों को स्वतंत्र और न्यायपूर्ण तरीके से कार्य करने की आजादी नहीं मिल रही है, जो कि एक संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता पर बड़ा सवालिया निशान लगाता है। इस गंभीर मसले पर चिंता जताते हुए अखिलेश यादव ने मांग की है कि देश की सर्वोच्च अदालत यानी माननीय सुप्रीम कोर्ट को इस पूरे मामले का स्वतः संज्ञान लेना चाहिए, ताकि चुनाव आयोग जैसी निष्पक्ष संस्था की गरिमा और पारदर्शिता बनी रहे।
अखिलेश यादव के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में एक बार फिर से निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर बहस छिड़ गई है। विपक्षी दल लगातार सरकार और संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज के तौर-तरीकों पर सवालिया निशान लगा रहे हैं। इस बयान के राजनीतिक गलियारों में दूरगामी असर देखने को मिल सकते हैं, क्योंकि चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर विपक्ष लगातार मुखर होता जा रहा है।











