भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले गिरकर पहली बार 93 के स्तर के पार पहुंच गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली इसका मुख्य कारण माना जा रहा है।
रुपया शुक्रवार को 92.89 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर खुला और कुछ ही देर में गिरकर 93 के पार पहुंच गया। मुद्रा विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली रुपये पर दबाव बना रही है।
विशेषज्ञ केएन डे के मुताबिक, रुपया 93.15 के आसपास ट्रेड कर रहा है और इसमें फिलहाल स्थिरता के संकेत नहीं दिख रहे हैं। उन्होंने बताया कि मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने के कोई संकेत नहीं हैं, जिससे बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत भी हाल ही में 116 डॉलर तक पहुंच गई थी, जो अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है।
उन्होंने यह भी बताया कि 1 मार्च से अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से करीब 80 हजार करोड़ रुपये (लगभग 8.5 अरब डॉलर) की निकासी की है, जिससे रुपये पर और दबाव बढ़ा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव कम होता है, तभी रुपये में गिरावट पर कुछ विराम लग सकता है। फिलहाल भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हस्तक्षेप से गिरावट की रफ्तार धीमी जरूर हो रही है, लेकिन रुझान अब भी कमजोर बना हुआ है।
वहीं अन्य विशेषज्ञों का कहना है कि अगर रुपया 93 के ऊपर टिकता है तो यह और कमजोरी की ओर संकेत देगा, जहां 93.20 से 93.40 तक का स्तर अगला प्रतिरोध हो सकता है।
रुपये में यह लगातार गिरावट वैश्विक अस्थिरता, महंगे कच्चे तेल और पूंजी निकासी का असर साफ दिखा रही है, जिससे आने वाले समय में बाजार पर और दबाव बढ़ सकता है।



