1984 में बनी योजना अब बन रही हकीकत

जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में सावलकोट पनबिजली परियोजना का निर्माण शुरू
नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (NHPC) ने बुधवार को इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए अंतरराष्ट्रीय टेंडर जारी किए। यह 1,856 मेगावॉट क्षमता का रन-ऑफ-रिवर प्रोजेक्ट है, जो दो चरणों में बनेगा।

पाकिस्तान के विरोध और पर्यावरणीय अड़चनों से लटका था प्रोजेक्ट

यह परियोजना पिछले चार दशकों से पाकिस्तान की आपत्तियों और स्थानीय स्तर पर मुआवज़ा, भूमि हस्तांतरण, फॉरेस्ट क्लीयरेंस और सेना के ट्रांजिट कैंप के स्थानांतरण जैसी समस्याओं के कारण रुकी हुई थी।

भारत की रणनीतिक चाल: सिंधु जल संधि पर रोक का फायदा

भारत ने सिंधु जल संधि को रोक पर रखते हुए इस परियोजना की प्रक्रिया तेज कर दी है। यह एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है, जिससे भारत चेनाब नदी के जल का अधिकतम उपयोग कर सकेगा।

ओमर अब्दुल्ला बोले – “अब कोई रुकावट नहीं बची”

मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने कहा कि यह प्रोजेक्ट राज्य ही नहीं, देश के लिए ऐतिहासिक महत्व का है। उन्होंने बताया कि 1996 में डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने नॉर्वेजियन कंपनी की मदद से इसे शुरू करने की कोशिश की थी, जो विफल रही। बाद में भी प्रयास हुए, लेकिन इसे पिछली सरकारों ने ठंडे बस्ते में डाल दिया था।

रामबन विधायक बोले – “देश की सबसे बड़ी परियोजना, अब बनेगी हकीकत”

विधायक अर्जुन सिंह राजू ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि यह परियोजना जम्मू-कश्मीर ही नहीं, पूरे देश को लाभ पहुंचाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला की लगातार कोशिशों से यह संभव हो पाया है।

22,704.8 करोड़ रुपये की लागत, सभी क्लीयरेंस मिल चुके

सभी पर्यावरणीय और प्रशासनिक बाधाएं अब समाप्त हो चुकी हैं। इस महीने की शुरुआत में फॉरेस्ट एडवाइजरी कमेटी ने 847 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन को ‘इन प्रिंसिपल’ मंजूरी दे दी।

2021 में NHPC के साथ MoU, अब BOOT मॉडल पर बनेगा प्रोजेक्ट

1984 में बनी इस परियोजना को 1985 में NHPC और फिर 1997 में JKSPDC को सौंपा गया था। 2021 में NHPC के साथ एक समझौता हुआ, जिसमें इसे बिल्ड-ओन-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOOT) मॉडल पर लागू करने की योजना बनी।

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