मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच मंगलवार तड़के इराक के कुर्द क्षेत्र में स्थित संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के वाणिज्य दूतावास को ड्रोन हमले का निशाना बनाया गया। यह हमला उस वक्त हुआ जब कुछ ही घंटे पहले UAE ने क्षेत्रीय संघर्ष में खुद को “अनुचित तरीके से घसीटे जाने” पर नाराजगी जाहिर की थी।
रिपोर्ट के मुताबिक ड्रोन हमले में वाणिज्य दूतावास की इमारत को संरचनात्मक नुकसान पहुंचा है। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां मामले की जांच में जुट गई हैं।
संघर्ष के बीच बढ़ा तनाव
मध्य पूर्व में हालिया तनाव तब और बढ़ गया जब 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल ने संयुक्त सैन्य अभियान के तहत ईरान के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। इसके बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा हालात संवेदनशील हो गए हैं।
UAE के विदेश मंत्रालय ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह “क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरनाक उकसावा” है। मंत्रालय ने स्पष्ट कहा कि किसी भी राजनयिक मिशन या परिसर को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून और कूटनीतिक नियमों का खुला उल्लंघन है।
हालांकि UAE ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि ड्रोन हमला किसने किया या यह ड्रोन कहां से छोड़ा गया था।
UAE ने पहले ही जताई थी नाराजगी
हमले से एक दिन पहले UAE ने बयान जारी कर कहा था कि उसे “बिना वजह” इस क्षेत्रीय संघर्ष में निशाना बनाया जा रहा है। UAE ने यह भी स्पष्ट किया कि वह ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं है और इस युद्ध में नहीं पड़ना चाहता।
ऑस्ट्रेलिया ने भेजी सैन्य सहायता
क्षेत्र में बढ़ते खतरे को देखते हुए ऑस्ट्रेलिया ने UAE की सुरक्षा मजबूत करने के लिए सैन्य सहायता भेजने का फैसला किया है। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री Anthony Albanese ने घोषणा की कि ऑस्ट्रेलिया मिसाइल और सैन्य विमान UAE भेजेगा।
उन्होंने कहा कि यह कदम पूरी तरह रक्षात्मक है और इसका उद्देश्य क्षेत्र में मौजूद ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों और UAE के सहयोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
ऑस्ट्रेलिया एक E-7A Wedgetail एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम विमान भी तैनात करेगा। यह विमान शुरुआती चार हफ्तों तक खाड़ी क्षेत्र के हवाई क्षेत्र की निगरानी करेगा और संभावित खतरों पर नजर रखेगा।
इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया UAE को मध्यम दूरी की उन्नत एयर-टू-एयर मिसाइलें भी उपलब्ध कराएगा। यह फैसला ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री और UAE के राष्ट्रपति Mohammed bin Zayed Al Nahyan के बीच हुई उच्च स्तरीय बातचीत के बाद लिया गया है।
ट्रंप ने युद्ध जल्द खत्म होने का दिया संकेत
इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि यह सैन्य अभियान जल्द समाप्त हो सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस अभियान के जरिए क्षेत्र में मौजूद खतरे को हमेशा के लिए खत्म करना चाहता है।
ट्रंप ने यह भी कहा कि इस कार्रवाई का उद्देश्य तेल और गैस की कीमतों को स्थिर करना और अमेरिकी परिवारों पर आर्थिक बोझ कम करना है। उन्होंने इस सैन्य हस्तक्षेप को “अल्पकालिक कार्रवाई” बताते हुए कहा कि इसका मकसद क्षेत्र में मौजूद खतरों को खत्म करना है।
मध्य पूर्व में जारी यह संघर्ष अब 10 दिन से ज्यादा का हो चुका है और लगातार नए घटनाक्रम सामने आ रहे हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति और संवेदनशील हो सकती है।














